02 सितंबर 2017

मेरी और तुम्हारी कहानी

मेरी और तुम्हारी कहानी,
एक दिन यह ज़माना पढ़ेगा,
और ना जाने कितनी
कवितायें गढ़ेगा l

हर छन्द में,
नाम होगा मेरा और तुम्हारा,
किसी ना किसी टूटे स्वप्न का,
होगा यह सहारा l


झरने की तरह,
बहती भावों की माला,
सेहलायेगी और,
बुझायेगी पीड़ित हृदय की ज्वाला l

मेरी और तुम्हारी कहानी,
कुछ अनसुनी और कुछ सुनी,
स्नेह की धारा l
                         

1 टिप्पणी:

आभार है मेरा