02 सितंबर 2017

खाली पन्ने .....

अक्सर खाली पन्नों  पे,
लिखती हूँ तुम्हारा नाम |

क्या कभी इन पन्नों  पर,
तुम्हारे संग जुड़ पायेगा,
मेरा नाम ?
अब पन्नों  की एक किताब,
फड़फड़ा  रही है,
रुआंसे कोने में |

स्याही भी यही पूछती है मुझसे,
क्यूँ लिखती हो उसका नाम,
जिससे  कभी ना जुड़ा तुम्हारा नाम?

1 टिप्पणी:

  1. सुंदर कविता👌
    वंदना जी आप की कविताएँ भावपूर्ण बहुत सुंदर है।

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आभार है मेरा