02 मार्च 2015

वसंत बहार - होली की फुहार


हर तरफ रंगों की रंगोली है,
मन में ख़ुशी की लहर,
और दिल में प्रसन्नता की डोली है। 

प्रकृति के असंख्य रंग,
खिलें हैं हर्ष के संग,
और उड़ रहा है मन हवा के संग। 

पंछियों का कोलाहल,
एक मधुर राग है,
चहुँ ओर छाया रंग है,चाहे आकाश हो या भूतल। 

खो जाऊं इन रंगों में, 
वसंत की फुहारों में,
कहीं झूलें, तो कहीं ठिठोली,
यही तो है खुशियों की होली। 




4 टिप्‍पणियां:

  1. कहीं झूलें, तो कहीं ठिठोली,
    यही तो है खुशियों की होली। ha sach hi to hai ...

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  2. कविता बहती है भावों की सरिता के रूप में.. आभार इस कविता के लिए!!

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आभार है मेरा