30 September 2014

हे ! शक्ति

 
हे ! शक्ति,
मुझे शक्ति दे ,
सयंम और भक्ति दे। 

स्फूर्ति से प्राण भर ,
सब कष्ट दूर कर। 
भयावह यह संसार है ,
तुझमें प्यार  अपार है। 
सींच मुझे स्नेह से,
दृढ़ता का वरदान दे।

हे ! शक्ति,
मुझे शक्ति दे ,
सयंम और भक्ति दे।

हो रही परास्त हूँ ,
स्तब्द्ध और निराश हूँ। 
संशय से मन भरा हुआ ,
अदृश्य भय से डरा हुआ। 
ले त्रिशूल अपना ,
उन्हें ध्वस्त कर,
मन मेरा सशक्त कर। 

हे ! शक्ति,
मुझे शक्ति दे ,
सयंम और भक्ति दे।



1 comment:

  1. स्फूर्ति से प्राण भर ,
    सब कष्ट दूर कर।
    भयावह यह संसार है ,
    तुझमें प्यार अपार है।
    सींच मुझे स्नेह से,
    दृढ़ता का वरदान दे। bahut sundar ...

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आभार है मेरा

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