16 मई 2013

नमन

आज तुम्हारी बाँहों में बिखर जाऊँ ,
पिरो लो मुझे इन  गीतों में,
शायद कुछ संवर जाऊं l

अमलताश के फूलों में,
गुलमोहर के झूलों में ,
कुछ मीठी भूलों में,तुम ही तो हो l

भिगोती है तुम्हारी चाहत,
मुझे हर पल पल,
तुमसे ही तो बहता  है मेरा जीवन कल कल l

उम्मीद से सजी है दुनिया मेरी ,
तुम्हारी ही कल्पनाओं से,
नमन है तुम्हें मेरा, इन् कविताओं से l




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आभार है मेरा