27 मई 2013

तुम


इन राहों पर चलते यूँ लगे शायद  अगले मोड़ पर , तुम खड़े हो।
मुझसे मिलोगे तो कहोगे," कब से तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ।"

पेड़ो के पतों की हर आहट पे लगे,की तुम छुपकर मुझे देख रहे हो।
तुम्हारी नजरें कह रही हो,"देखो मै  यहाँ हूँ।"

गूंज रही  है कानो में तुम्हारी वही  हंसी ठिठोली।
जो कहती है ," मुझ पर भरोसा रखो।"

इस जीवन का अंत होगा जब ,खड़ी  होंगी मै वहां तब।
निहारूंगी तुम्हारी ही बाट , अटूट  बंधन में बंधने का है हमारा साथ।



24 मई 2013

जय शिव शंकर


जय शिव शंकर तुम हो पालनहारी,
तुमसे ही तो  चलती है यह सृष्टि सारी  l 

गंगा को दिया मान,
धर अपने शीश पर दिया सम्मान l 

तुम विषधारी फिर भी हो शुभकारी,
सब जनों के तुम हो अधिकारी l 

नागों का हार गले में तुम्हारे,
मुंडमाला तुम्हें सवारें l 

फिर भी तुम हो मंगलकारी,
इस जग के पालनहारी l 



मेरे सपनों की दुनिया

 मेरे सपनों की दुनिया,
है हकीकत से परी ये दुनिया l 

कहीं है फूलों की खुशबू 
कहीं है मधु की महक l 
कहीं है भवरों का गुंजन,
कहीं है चिड़यों  की चहक  l 
कभी तुम्हारा  हाथ है मेरे हाथ में,
कभी मेरा हाथ है तुम्हारे सिराहने l 
कभी तुम कविता लिख रहे हो ,
कभी तुम  गुनगुना रहे हो l 


मेरे सपनों की दुनिया,
है हकीकत से  परे  ये दुनिया l 

18 मई 2013

लेकिन




ज़िन्दगी एक मोड़ पे आके थम सी गयी है ,
ऐसा लगता है जैसे सब कुछ मिलने वाला है ,
लेकिन अभी हाथ खाली हैं।

जमीन से आसमान तक का रास्ता तै करना है,
लेकिन पंख उगाने की कोशिश  अभी जारी  है।

मुझे बहुत दूर, बहुत ऊँचा जाना है ,
लेकिन सफ़र की तयारी  अभी बाकि है,
लेकिन सफ़र की तयारी अभी बाकि है

दर्द


यह दर्द इस दिल का एहसास बन चुका है ,
 हो तोह  ढूँढू  उसे , इतना ख़ास बन चुका है 

रह , रह कर उठती है टीस इन् जख्मों के बीच ,
क्या सुनुक्या कहूँ , आखिर है वोह क्या चीज़ 

हथेली की लकीरों का है यह सारा खेल ,
 जाने अब किस जन्म  अपना मेल 

जहाँ भी जाओ ख़ुशी तुम्हारे संग हो,
मन में कल कल बहती  उमंग हो 

मेरी लिखी कविताओं का सार हो तुम ,
कुछ मीठी यादों का आभार हो तुम,
और मुझे जो निखार देवोह श्रींगार हो तुम 



16 मई 2013

नमन

आज तुम्हारी बाँहों में बिखर जाऊँ ,
पिरो लो मुझे इन  गीतों में,
शायद कुछ संवर जाऊं l

अमलताश के फूलों में,
गुलमोहर के झूलों में ,
कुछ मीठी भूलों में,तुम ही तो हो l

भिगोती है तुम्हारी चाहत,
मुझे हर पल पल,
तुमसे ही तो बहता  है मेरा जीवन कल कल l

उम्मीद से सजी है दुनिया मेरी ,
तुम्हारी ही कल्पनाओं से,
नमन है तुम्हें मेरा, इन् कविताओं से l




06 मई 2013

आशा


समझती हूँ मैं तुम्हारी  व्यथा
और दुःख से भीनी हवा l

दूर हो रहे हो जो मुझसे 

खो दूंगी मैं ,खुद को खुद से l

जानती हूँ यह क्षण भर को है,
झड जायेगा पत्ते की तरह l

नयी कोपलें फिर फूटेंगी ,
आशाओं की रुधिर किरणे फिर चमकेंगी l

ठंडी बयार का बहेगा झोंका ,
संग लायेगा खुशियों का झरोखा l

विसर्जित है तुम्हें पूर्ण समर्पण ,
है यह मेरा तन मन अर्पण  l

प्यार की परिभाषा


क्या है प्यार की परिभाषा ?
है यह निरंतर बहती आशा या 
भावनाओं में सिमटी निराशा !

क्यों परे नहीं है ,यह समाज के नियमों से ?

शायद इसलिए कि बंधा है सयंम से या 
विचर सकता है अथाह व्योम में !
कभी थामोगे मेरा हाथ तुम ?
कहते हो यह बंधन अटूट है ,पर,
जुड़ा है किसी  ओर  के संग !

वचन देता हूँ, अगले जन्म ,

रंग दूंगा , तुम्हें , अपने ही रंग! 

वह

पोह फटने से पहले उठ जाती ,
करती ढेर सारा काम ,
पल भर  भी  जिसको नहीं आराम,
वह गाँव की औरत है।


कपडे धोती बर्तन धोती,
करती  सबकी देखभाल,
कैसे आये आराम का ख्याल,
वह गाँव की औरत है।
खेतीबाड़ी का काम भी करे वोह,
नहीं देखती अपना चैन,
उसको तो करना  काम दिन रैन ,
वह गाँव की औरत है।

पशुओं को भी देती प्यार,
करती है वोह कठोर परिश्रम,
जब तक है उसके दम में दम,
वह गाँव की औरत है।


भीड़


यहाँ  देखो, वहां देखो ,
हर तरफ भीड़  है ,
भीड़  को  ही रोंद्ती ,
कैसी यह भीड़ है ?

सड़क पर, रेलों में ,
सब्जी के ठेलों में,
घर की छतों को तोड़ती ,
ऐसी यह भीड़ है !
घट रहे हैं स्त्रोत भी  ,
बढ़ रहे  हैं लोग जो,
तीर की तरह चीरती ,
देखो यह भीड़ है !

भीड़ पर जो लगे,
लगाम,
तभी देश का हो,
ऊँचा
मकाम !